कस्पल पद्धति

मित्रों हमारे भारतीय ज्योतिष मे किसी भी व्यक्ति (जातक) के बारे मे जानने के लिये ज्योतिष की अलग-अलग विधाये अथवा शाखाये है। इन्ही मे से एक शाखा है। कुण्डली रहस्य कुण्डली के बारे मे तो हम सभी जानते है। किन्तु आज हम कुण्डली के अन्दर भी एक कुण्डली जिसे हम कस्पल पद्धति कहते है। उसके बारे मे जानने की कोशिष करते है । उदाहरण के तोर पर यदि हमे किसी भी व्यक्ति के कार्यक्षेत्र अथवा व्यवसाय के बारे मे जानना हो तो सर्वप्रथम हमको यह देखना होगा कि लग्न का स्वामी किस-किस घर मे है। कस्पल पद्धति की भाषा मे मित्रों इसे सब-सब लाॅर्ड कहा जाता है।

किसी जातक विशेष के व्यवसाय इत्यादि के बारे में जानने के लिये सर्वप्रथम लग्न के सब-सब लाॅर्ड को पढ़ें। अगर इसका संबंध/योग/लिंकेज 6ठे भाव से, 7वें भाव से, 10वें भाव से बन रहा है। तो जातक विशेष को 6ठे, 7वें, और 10वें भाव के फल मिलना निष्चित है। ऐसे ही आप 10वें भाव के सब-सब लाॅर्ड की स्टडी करें और देखें कि क्या 10वें भाव का सब-सब लाॅर्ड 2रें 6ठें 7वें भाव से लिंकेज बना रहा है? अगर 10वें भाव के संबंध 2रें, 6ठें, या 7वें भाव से बनते हैं तो आप यह कह सकते हैं कि वह जातक अपनी जिंदगी में कुछ काम/व्यवसाय/ नौकरी अवष्य करेगा अगर दशा काल के ग्रह तथा गोचर उसे सपोर्ट करेंगे तो।

आगे विचार करते हैं कि एक विषिष्ट जातक अपनी जिंदगी मे नौकरी करेगा अथवा स्वयं का कारोबार या फिर यह जातक दोनों ही काम करने में सक्षम होगा? इसको जानने का कस्पल कुण्डली मे बहुत ही आसान तरीका है। अगर जातक के लग्न का सब-सब लाॅर्ड 6ठें और 10वें भाव से और साथ में 10वें भाव का सब-सब लाॅर्ड 6ठें और दूसरे भाव से संबंध बनाता है तथा 6ठे भा क का सब-सब लाॅर्ड भी 10वें से लिंकेज बनाये तो यह योग यह इंगित करता है कि उक्त जातक के नौकरी करने के संकेत अधिक है। ऐसे ही अगर लग्न और 10वें भाव के सब-सब लाॅर्ड की लिंकेज 7वें भाव से और 7वें भाव के सब-सब लाॅर्ड की लिंकेज 10वें भाव से बने तो वह व्यक्ति स्वयं का व्यवसाय करने मे ज्यादा सक्षम होगा।

ऐसे ही अगर लग्न और 10वें भाव के सब-सब लाॅर्ड अगर 6ठें और 7वें भाव (दोनों) से संबंध बनायें तो समझिये उस जातक में नौकरी और स्वयं का कारोबार करने दोनों की क्षमता है वह दोनों काम करने में सक्षम है। वह जातक नौकरी कब करेगा और अपना व्यवसाय कब करेगा यह दशा काल के ग्रह सुनिष्चित करेंगे।

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अगर दषा काल के ग्रह 6ठें और 10वें भाव से प्रबल योग बनायेंगे तो वह जातक उस दषा विशेष में नौकरी करेगा और अगर दषा काल के ग्रह 10वें और सातवें भाव से ज्यादा प्रबल योग बनायेंगे तो वह जातक उस दशा विशेष मे स्वयं का व्यवसाय करेगा और अगर दशा काल के ग्रह 6ठें, 7वें और 10वें भावों से लिंकेज बनायेंगे तो वह जातक एक साथ नौकरी तथा स्वयं का कारोबार करने में सक्षम होगा बशर्ते गोचर भी फेवर करे। ज्योतिष का एक स्वर्णिम नियम है कि कोई भी सांकेतिक घटना एन ग्रहों के संयुक्त काल में घटित/फलित होगी जो ग्रह उस विषिष्ट घटना/वृत्तांत/इवेंट के परिपूर्ण कारक ग्रह होंगे बशर्ते गहों का गोचर भी इवेंट देने को सपोर्ट करें।

1. सबसे प्रथम प्रश्न कुण्डली से हम लग्न को फिक्स करते हैं। चूंकि प्रश्नकर्ता ने स्वयं के बारे में प्रश्न किश है इसलिये इस कुण्डली में लग्न को ही प्रश्नकर्ता का लग्न मानेंगे।

2. लग्न फिक्स करने के पश्चात हम कुण्डली की सत्यता को परखेंगे। सत्यता परखने का मतलब यह है कि पश्नकर्ता के मन मस्तिष्क में जो प्रश्न आ रहा था या प्रश्नकर्ता जिस प्रश्न का हल जानना चाहता था क्या इस प्रश्न का संबंध इस कुण्डली में प्रासंगिक भावों के साथ है या नही। इसे परखने के लिये चंद्र या इसके नक्षत्र स्वामी ग्रह का प्रासंगिक भावों मे या कस्पल पोजिशन्स में प्रकट होना अनिवार्य है। अगर चंद्र या इसका स्टार लाॅर्ड ग्रह प्रासंगिक भावों में प्रकट नहीं होता तो इसका स्पष्ट मतलब है कि कुण्डली में प्रश्न की सत्यता नही झलकती चूंकि यह प्रश्न नौकरी के विषय में है तो चंद्र या इसके नक्षत्र स्वामी ग्रह बुध छठे भाव में प्रकट हो रहा है इसलिये हम कह सकते है कि कुण्डली में सत्यता स्थापित होती है।

3. कुण्डली में सत्यता स्थापित होने के पश्चात अब हम लग्न, 10वें, 6ठें और 11वें भाव के सब-सब लाॅर्ड की स्टडी प्रोमिस/संकेत/सामथ्र्य पढ़ने के लिये करेंगे। अगर इन चारों भावों के (1,6,10,11) सब-सब लाॅर्ड 2,6,10 से संबंध /लिंकेज स्थापित करेंगे तो ही हम कह पायेंगे कि उक्त जातक को नौकरी मिलने की आषा हैं आइये देखें इन चारों भावों के सब-सब लाॅर्ड क्या संकेत करते है। लग्न का सब-सब लाॅर्ड शनि है। शनि स्वयं स्थानीय बल (पोजिशनल स्टेटस) के साथ पंचम भाव मे बैठा है। परंतु शनि बुध के नक्षत्र में, राहु के उप नक्षत्र में और मंगल के उप-उप नक्षत्र में है इसको हम Mar)शनि-बुध-राहु/गुरू-मंगल (Sat is in mer Star, Rahu Sub and in Mar sub sub) नक्षत्र स्वामी ग्रह बुध छठे भाव में बैठा है इसलिये शनि छठे भाव का फल देने में सक्षम हो जाता है। शनि राहु के उपनक्षत्र में है और राहु स्वयं दूसरी छठी और ग्यारहवीं कस्पल पोजिशनन में सब सब लाॅर्ड के रूप में प्रकट हो रहा है और राहु को गुरू का फल भी देना है। गुरू 10वीं कस्पल पोजिशन में राशि स्वामी के रूप में प्रकट हो रहा हैं। इसलिये लग्न का सब-सब शनि प्रासंगिक भावों का सिग्नीफिकेटर बन जाता है। इसे हम ऐसे भी कह सकते है कि छठे भाव की इन्वोल्वमेंट होकर 2रें, 6ठें, 10वें और 11वें भाव से (कमिटमेंट) प्रतिबद्धता हो रही है या लग्न भाव का संबंध रिलेटेड/प्रासंगिक भावों से बन रहा है। अब हम मूल भाव (छठे) का अध्ययन करेंगे। इस कुण्डली में छठे भाव का सब-सब लाॅर्ड राहु है। राहु का स्थानीय बल (पोजिषनल स्टेटस) है और वह 2रें, 6ठे, 10वें, और 11वें भावों के फल देने में सक्षम है। क्योकि राहु स्वयं 2रें, 6ठें, और 11वें भाव का सब-सब लाॅर्ड है। राहु गुरू के नक्षत्र में है और राहु के ही सब और सब-सब में है, गुरू 10वें भाव का राशि स्वामी है। इसलिये हम कह सकते है कि 2,6,10 और 11वें भाव की इन्वोल्वमेंट होकर इन्ही (2, 6, 10, 11,) भावों से कमिटमेंट हो रही हैं इसलिये राहु ग्रह बहुत प्रबल कारक ग्रह बन जाता है। इन उक्त भावों का फल देने में। छठे भाव के सब-सब लाॅर्ड का अध्ययन करने के चश्चात अब हम 10वें भाव के सब-सब लाॅर्ड की स्टडी करेंगे और यह सुनिश्चित जो व्यवसाय का भाव है वह क्या योग/लिंकेज बनाता है। 10वां सब-सब लाॅर्ड ममंगल है और मंगल का स्थानीय बल (पोजिशनल स्टेटस) है। इसलिये मंगल स्वयं ही सक्षम हो जाता है उन भावों का फल देने में जहां मंगल बैठा हा या जिन कस्पल पोजिशन्स ममें मंगल स्वयं प्रकट हो रहा हो। इस कुण्डली में मंगल छठे भाव में बैठा है और 2रें भाव में राशि स्वामी 5वें भाव में सब-सब, 9वें भाव में राशि स्वामी और 10वें भाव में सब-सब लाॅर्ड के रूप में प्रकट हो रहा हेै। 2रा और 10वें भाव इस प्रश्न से संबंध रखते है अथवा 2रें और 10वें भाव की इन्वोल्वमेंट हो गई है अथवा मंगल दूसरे और दसवें भाव के फल देने में सक्षम है। मंगल, राहु के उपनक्षत्र में और बुध के उप उपनक्षत्र में है मतलब राहु के साथ कमिटमेंट/प्रतिबद्धता हो रही है और ऊपर हम देख चुके है। कि इस कुण्डली में राहु प्रबल कारक ग्रह बनता है 2, 6, 10, और 11वें भाव के फल देने में। मंगल बुध के सब-सब में है क्योंकि बुध को यहां फाइनल कनफर्मेशन करनी है और बुध तो छठे भाव का कारक है। अब हम 11वें भाव, जो कि परिणाम की इच्छापूर्पि का भाव है इसका अध्ययन करेंगे। 11वां भाव भी अगर 2, 6, 10 वें भाव का परिपूर्ण कारक बनेगा तोे ही इस जातक को व्यवसाय मिलेगा अथवा नहीं। 11वां भाव हमें यह भी बताता है कि यह इवेंट/घटना/वृत्तात जल्द होेगा याह फिर देर से। आइये 11वें भाव के उप उप नक्षत्र का अध्ययन करें। 11वें भाव का सब सब लाॅर्ड भी राहु ही है और ऊपर हम पढ़ चुके है। कि राहु इस प्रश्न कुण्डली में सभी प्रासंगि भावों का परिपूर्ण कारक बनता है। लग्न, छठे, 10वें और 11वें भाव की स्टडी करने के उपरांत हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि उक्त जातक/प्रश्नकर्ता को नौकरी मिलने के संकेत प्रबल है। अब हमें इस नतीजे पर पहुंचना है कि जातक को नौकरी कब मिलेगी? उसे नौकरी शीघ्र मिलेगी अथवा मिलब से। लग्न, छठा, 10वां, 11वां भाव तो यह बतलाता है कि जातक को व्यवसाय मिलने के संकेत बिना विंलब के हैं क्योंकि ये चारों भाव नेगेटिव लिंकेज/योग कम बना रहे है और प्रासंगिक भावों के साथ प्रबल योग बन रहा है। अब 11वें भाव को देखें वह क्या संकेत दे रहा है। 11वें भाव पर मकर राशि उदय हो रही है और मकर चर राशि हैं हम पहले भी बता चुके हैं कि अगर 11वें भाव में चर राशि उदय हो तो इवेंट जल्द होने के संकेत मिलते है। अगर स्थिर राशि उदय हो रही हो तो इवेंट विलंब से तथा द्विस्वभाव राशि उदय हो रही तो इवेंट न बहुत जल्द न बहुत विलंब से होता है। यह एक नियम है परिणामम के जल्द अथवा विलंब से घटित होने का अन्यथा कुछ और भी नियम है जो यह संकेत देते हैं कि घटना जल्द घटेगी अथवा विलंब से।

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